Input Device

Input Devices of Computer (कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस)

Input Device वे Device होते है जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को Computer में Input करा सकते हैं| इनपुट डिवाइस कंप्यूटर तथा मानव के मध्य संपर्क की सुविधा प्रदान करते हैं| Computer में कई Input Device होते है ये Devices Computer के मस्तिष्क को निर्देशित करती है की वह क्या करे? Input Device कई रूप में उपलब्ध है तथा सभी के विशिष्ट उद्देश्य है टाइपिंग के लिये हमारे पास Keyboard होते है, जो हमारे निर्देशों को Type करते हैं|


Input Device वे Device है जो हमारे निर्देशों या आदेशों को Computer के मष्तिष्क, सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं|

Input Device कई प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार है –

  • Keyboard
  • Mouse
  • Joystick
  • Trackball
  • Light pen
  • Touch screen
  • Digital Camera
  • Scanner
  • Digitizer Tablet
  • Bar Code Reader
  • OMR
  • OCR
  • MICR
  • ATM etc.

1. Keyboard - की-बोर्ड

की-बोर्ड कंप्यूटर का एक पेरिफेरल है जो आंशिक रूप से टाइपराइटर के की-बोर्ड की भांति होता हैं| की-बोर्ड को टेक्स्ट तथा कैरेक्टर इनपुट करने के लिये डिजाइन किया गया हैं| भौतिक रूप से, कंप्यूटर का की-बोर्ड आयताकार होता हैं|

इसमें लगभग 108 Keys होती हैं| की-बोर्ड में कई प्रकार की कुंजियाँ (Keys) होती है जैसे- अक्षर (Alphabet), नंबर (Number), चिन्ह (Symbol), फंक्शन की (Function Key), एर्रो की (Arrow Key) व कुछ विशेष प्रकार की Keys भी होती हैं|

Type Of Keys

हम की-बोर्ड की संरचना के आधार पर इसकी कुंजियो को छ: भागो में बाँट सकते है -

  • एल्फानुमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)
  • न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad)
  • फंक्शन की (Function Keys)
  • विशिष्ट उददेशीय कुंजियाँ (Special Purpose Keys)
  • मॉडिफायर कुंजियाँ (Modifier Keys)
  • कर्सर कुंजियाँ (Curser Keys)
एल्फानुमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)

Alphanumeric Keys की-बोर्ड के केन्द्र में स्थित होती हैं| Alphanumeric Keys में Alphabets (A-Z), Number (0-9), Symbol (@, #, $, %, ^, *, &, +, !, = ), होते हैं| इस खंड में अंको, चिन्हों, तथा वर्णमाला के अतिरिक्त चार कुंजियाँ Tab, Caps, Backspace तथा Enter कुछ विशिष्ट कार्यों के लिये होती हैं|

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad)

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad) में लगभग 17 कुंजियाँ होती हैं| जिनमे 0-9 तक के अंक, गणितीय ऑपरेटर (Mathematics operators) जैसे- +, -. *, / तथा Enter key होती हैं |

फंक्शन की (Function Keys)

की-बोर्ड के सबसे ऊपर संभवतः ये 12 फंक्शन कुंजियाँ होती हैं| जो F1, F2……..F12 तक होती हैं| ये कुंजियाँ निर्देशों को शॉट-कट के रूप में प्रयोग करने में सहायक होती हैं| इन Keys के कार्य सॉफ्टवेयर के अनुरूप बदलते रहते हैं|

विशिष्ट उददेशीय कुंजियाँ (Special Purpose Keys)

ये कुंजियाँ कुछ विशेष कार्यों को करने के लिये प्रयोग की जाती है| जैसे- Sleep, Power, Volume, Start, Shortcut, Esc, Tab, Insert, Home, End, Delete, इत्यादि| ये कुंजियाँ नये ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ विशेष कार्यों के अनुरूप होती हैं|

मॉडिफायर कुंजियाँ (Modifier Keys)

इसमें तीन कुंजियाँ होती हैं, जिनके नाम SHIFT, ALT, CTRL हैं| इनको अकेला दबाने पर कोई खास प्रयोग नहीं होता हैं, परन्तु जब अन्य किसी कुंजी के साथ इनका प्रयोग होता हैं तो ये उन कुंजियो के इनपुट को बदल देती हैं| इसलिए ये मॉडिफायर कुंजी कहलाती हैं|

कर्सर कुंजियाँ (Cursor Keys)

ये चार प्रकार की Keys होती हैं UP, DOWN, LEFT तथा RIGHT | इनका प्रयोग कर्सर को स्क्रीन पर मूव कराने के लिए किया जाता है|

Type of Keyboards - की-बोर्ड के प्रकार
साधारण कीबोर्ड (Normal Keyboard)

साधारण कीबोर्ड वे कीबोर्ड होते हैं, जो सामान्य रूप से प्रयोग (Use) किये जाते हैं, जिसे User अपने PC में प्रयोग करता हैं | इसका आकार आयताकार होता है, इसमें लगभग 108 Keys होती हैं एवं इसे Computer से Connect करने के लिए एक Cable होती हैं जिसे CPU से जोडा जाता हैं|

तार रहित की-बोर्ड (Wireless Keyboard)

तार रहित की-बोर्ड (Wireless Keyboard) प्रयोक्ता (User) को की- बोर्ड में तार के प्रयोग से छुटकारा दिलाता है | कुछ कंपनियों ने तार रहित की-बोर्ड का बाजार में प्रवेश कराया है| यह की-बोर्ड सीमित दूरी तक कार्य करता है| यह तार रहित की-बोर्ड थोडा महँगा होता है तथा इसमें थोड़ी तकनीकी जटिलता होती है| इसमें तकनीकी जटिलता होने के कारण इसका प्रचलन बहुत अधिक नहीं हो पाया है|

अरगानोमिक की-बोर्ड (Ergonomic Keyboard)

बहुत सारी कंपनियों ने एक खास प्रकार के की-बोर्ड का निर्माण किया है, जो प्रयोक्ता (User) को टाइपिंग करने में दूसरे की-बोर्ड की अपेक्षा आराम देता है| ऐसे की-बोर्ड अरगानोमिक की-बोर्ड (Ergonomic Keyboard) कहलाते है ऐसे की-बोर्ड विशेष तौर पर प्रयोक्ता (User) की कार्य क्षमता बढाने के साथ साथ लगातार टाइपिंग करने के कारण उत्पन्न होने वाले कलाई (Wrist) के दर्द को कम करने में सहायता देता है |


1. Mouse - (माउस)

वर्तमान समय में माउस सर्वाधिक प्रचलित Pointer Device है, जिसका प्रयोग चित्र या ग्राफिक्स (Graphics) बनाने के साथ साथ किसी बटन (Button) या मेन्यू (Menu) पर क्लिक करने के लिये किया जाता है | इसकी सहायता से हम की-बोर्ड का प्रयोग किये बिना अपने पी.सी. को नियंत्रित कर सकता है |

माउस में दो या तीन बटन होते है जिनकी सहायता से कंप्यूटर को निर्देश दिये जाते है| माउस को हिलाने पर स्क्रीन पर Pointer Move करता है| माउस के नीचे की ओर रबर की गेंद (Boll) होती है| समतल सतह पर माउस को हिलाने पर यह गेंद घुमती है|

Works of Mouse - माउस के कार्य
  • क्लिकिंग (Clicking)
  • डबल क्लिकिंग (Double Clicking)
  • दायाँ क्लिकिंग (Right Clicking)
  • ड्रैगिंग (Dragging)
  • स्क्रोलिंग (Scrolling)
Type of Mouse - माउस के प्रकार
  1. मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse)
  2. प्रकाशीय माउस (Optical Mouse)
  3. तार रहित माउस (Cordless Mouse)
मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse)

मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse) वे माउस होते है| जिनके निचले भाग में एक रबर की गेंद लगी होती है जब माउस को सतह पर घुमाते है तो वह उस खोल के अंदर घुमती है माउस के अंदर गेंद के घूमने से उसके अंदर के सेन्सर्स (Censors) कंप्यूटर को संकेत (Signal) देते है|

प्रकाशीय माउस (Optical Mouse)

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad) में लगभग 17 कुंजियाँ होती हैं| जिनमे 0-9 तक के अंक, गणितीय ऑपरेटर (Mathematics operators) जैसे- +, -. *, / तथा Enter key होती हैं |

तार रहित माउस (Cordless Mouse)

तार रहित माउस (Cordless Mouse) वे माउस है जो आपको तार के झंझट से मुक्ति देता है| यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio frequency) तकनीक की सहायता से आपके कंप्यूटर को सूचना कम्युनिकेट (Communicate) करता हैं| इसमें दो मुख्य कम्पोनेंट्स ट्रांसमीटर तथा रिसीवर होते है ट्रांसमीटर माउस में होता है

जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (Electromagnetic) सिग्नल (Signal) के रूप में माउस की गति तथा इसके क्लिक किये जाने की सूचना भेजता है रिसीवर जो आपके कंप्यूटर से जुड़ा होता है उस सिग्नल को प्राप्त करता है |

1. जॉयस्टिक - (Joystick)

यह डिवाइस (Device) वीडियो गेम्स खेलने के काम आने वाला इनपुट डिवाइस (Input Device) है इसका प्रयोग बच्चो द्वारा प्रायः कंप्यूटर पर खेल खेलने के लिये किया जाता है| क्योकि यह बच्चो को कंप्यूटर सिखाने का आसान तरीका है| वैसे तो कंप्यूटर के सारे खेल की-बोर्ड द्वारा खेले जा सकते है परन्तु कुछ खेल तेज गति से खेले जाते है उन खेलो में बच्चे अपने आप को सुबिधाजनक महसूस नहीं करते है इसलिए जॉयस्टिक का प्रयोग किया जाता है |

ट्रैकबाल (Trackball)

ट्रैक बोंल एक Pointing input Device है| जो माउस (Mouse) की तरह ही कार्य करती है | इसमें एक उभरी हुई गेंद होती है तथा कुछ बटन होते है| सामान्यतः पकड़ते समय गेंद पर आपका अंगूठा होता है तथा आपकी उंगलियों उसके बटन पर होती है| स्क्रीन पर पॉइंटर (Pointer) को घुमाने के लिये अंगूठा से उस गेंद को घुमाते है ट्रैकबोंल (Trackball) को माउस की तरह घुमाने की आवश्यकता नहीं होती इसलिये यह अपेक्षाकृत कम जगह घेरता है | इसका प्रयोग Laptop, Mobile तथा Remold में किया जाता हैं |

टच स्क्रीन (Touch Screen)

टच स्क्रीन (Touch Screen) एक Input Device है| इसमें एक प्रकार की Display होती है| जिसकी सहायता से User किसी Pointing Device की वजह अपनी अंगुलियों को स्थित कर स्क्रीन पर मेन्यू या किसी ऑब्जेक्ट का चयन करता है|

किसी User को कंप्यूटर की बहुत अधिक जानकारी न हो तो भी इसे सरलता से प्रयोग किया जा सकता है | टच स्क्रीन (Touch Screen) का प्रयोग आजकल रेलवेस्टेशन, एअरपोर्ट, अस्पताल, शोपिंग मॉल, ए.टी.ऍम. इत्यादि में होने लगा है |


टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी (Touch Screen Technology) परिभाषा (Definition), कार्य (Working), प्रकार और अनुप्रयोग (Types & Applications)

टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी (Touch screen Technology) डिजिटल दुनिया के अंतर्गत स्क्रीन के अंदर के क्षेत्र में प्रत्यक्ष (direct) कार्य करने की सबसे अच्छा साधन है , अतः हम कह सकते है की टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी संकेतात्मक अर्थात संकेतो पर आधारित तकनीक(gesture-based technology) है | टच स्क्रीन में एक इलेक्ट्रॉनिक दृश्य प्रदर्शन क्षेत्र (electronic visual display) होता है जो अपने प्रदर्शन क्षेत्र(display area ) पर एक स्पर्श(touch) का पता लगाने में सक्षम है साधारणतः सामान्य अंगुली और हाथ के माध्यम से स्क्रीन पर स्पर्श(touch)किया जाता है जिससे स्क्रीन के अंदर के कार्य सम्पन्न होते है यह तकनीक माउस और कीबोर्ड के अधिकांश कार्यों को करने के लिए कंप्यूटर(computers), ऐसी मशीनों जो उपयोगकर्ता से पारस्परिक संपर्क करने में सक्षम होती है ( user interactive machines), स्मार्ट फोन, टैबलेट आदि में सबसे अधिक व्यापक रूप से(widely) उपयोग की जाती है।

टच स्क्रीन तकनीक पिछले कई वर्षों से उपयोग हो रही है, लेकिन हाल ही में उन्नत टच स्क्रीन तकनीक(advanced touch screen technology) अधिक उपयोग में आ गई है। कंपनियां इस तकनीक को अपने अधिक से अधिक उत्पादों (more of their products) में शामिल कर रही हैं। तीन सबसे आम टच स्क्रीन प्रौद्योगिकियों(touch screen technologies) में प्रतिरोधक (resistive), कैपेसिटिव (capacitive) और SAW (सतह ध्वनिक लहर(surface acoustic wave)) शामिल हैं। अधिकांश टच स्क्रीन डिवाइस (low-end touch screen device) में एक मानक सर्किट प्लग-इन बोर्ड (standard printed circuit plug-in board) होता है और इसका उपयोग SPI प्रोटोकॉल पर किया जाता है।

इस प्रणाली(system) के दो भाग हैं, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर।

हार्डवेयर आर्किटेक्चर (hardware architecture) में 8-बिट माइक्रोकंट्रोलर (micro-controller), कई प्रकार के इंटरफ़ेस (interface) और ड्राइवर सर्किट(driver circuits) का उपयोग करते हुए एक स्टैंड-अलोन एम्बेडेड सिस्टम (stand-alone embedded system) होता है। सिस्टम सॉफ़्टवेयर ड्राइवर(system software driver) इंटरेक्टिव C प्रोग्रामिंग भाषा(interactive C programming language) का उपयोग करके बनाया गया है।

टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी के प्रकार (Types of Touch Screen Technology)

टच स्क्रीन एक 2-आयामी सेंसिंग डिवाइस(2-dimensional sensing device) है अर्थात दो आयामो(X ,Y) के माध्यम से स्पर्श का पता लगाने वाली डिवाइस या उपकरण , जो 2 शीट मटेरियल(2 sheets material) से बनी है।

चार मुख्य टच स्क्रीन प्रौद्योगिकियां(touch screen technologies) हैं:

  1. प्रतिरोधक(Resistive)
  2. कैपेसिटिव(Capacitive)
  3. सर्फेस अकैसिकल वेव(Surface Acoustical wave (SAW))
  4. इंफ्रारेड (IR)

प्रतिरोधक(Resistive)

प्रतिरोधक टच स्क्रीन (Resistive touch screen) की सबसे ऊपरी परत बेहद लचीली होती है , जो कि पॉलीथिन से बनी होती है ,और निचली परत बेहद कठोर होती है जो कांच (glass) की बनी होती है जिनको डॉट्स (insulating dots) के माध्यम से टच स्क्रीन के नियंत्रक (touch screen controller) से जोड़ा जाता है|

प्रतिरोधक टच स्क्रीन पैनल (Resistive touch screen panel) अधिक किफायती(more affordable) होती हैं इस प्रकर की परत को शक्तिशाली वस्तुओं द्वारा क्षतिग्रस्त(damaged) किया जा सकता है। प्रतिरोधक टच स्क्रीन (Resistive touch screen) को 4-, 5-, 6-, 7-, 8- वायर्ड प्रतिरोधक टच स्क्रीन(wired resistive touch screen) में विभाजित किया गया है। इन सभी का निर्माण डिजाइन समान है लेकिन स्पर्श के निर्देशांक (coordinates of touch) निर्धारित करने के लिए इसकी प्रत्येक विधि में एक प्रमुख अंतर है।

कैपेसिटिव (Capacitive)

कैपेसिटिव (Capacitive) टच स्क्रीन पैनल की सामग्री के साथ लेपित(coated) होता है यह पैनल विद्युत आवेशों(electrical charges) को संग्रहीत(stores) करता है। कैपेसिटिव सिस्टम (Capacitive system) मॉनिटर से 90% तक प्रकाश संचारित(transmit) कर सकता है। सर्फेस-कैपेसिटिव तकनीक(Surface-capacitive technology) में इंसुलेटर (insulator) की केवल एक तरफ ही कंडक्टिंग लेयर(conducting layer) के साथ लेपित होती है। जब भी उंगली से स्क्रीन को छुआ जाता है, तो बिजली के आवेशों को ले जाने वाला अर्थात संवाहक (conduction of electric charges) अनियोजित परत के ऊपर (conduction of electric charges) होता है, जिसके परिणामस्वरूप गतिशील संधारित्र(dynamic capacitor) का निर्माण होता है। नियंत्रक(controller) तब स्क्रीन के चार कोनों में होने वाले परिवर्तनो को मापकर स्पर्श की स्थिति का पता लगाता है कि कहा स्पर्श किया गया है

अनुमानित कैपेसिटिव तकनीक(projected capacitive technology) में, प्रवाहकीय परत (इंडियम टिन ऑक्साइड) अर्थात जहा से विधुत प्रवाहित होता है को कई क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर इलेक्ट्रोड के ग्रिड के रूप में बनाया जाता है। इसमें स्पष्ट रूप से आईटीओ(ITO) पैटर्न का उपयोग करके एक्स और वाई अक्ष (x and y axis) दोनों के साथ संवेदन शामिल है। सिस्टम की सटीकता बढ़ाने के लिए, प्रोजेक्टिव स्क्रीन में पंक्ति और स्तंभ (row and column) के प्रत्येक इंटरैक्शन अर्थात प्रत्येक सेल (cell) में एक सेंसर होता है।

इन्फ्रारेड(Infrared):

इन्फ्रारेड टच स्क्रीन तकनीक में, एक्स और वाई अक्ष(X and Y axis) की एक सरणी(array) को आईआर एलईडी (IR LED) और फोटो डिटेक्टरों(photo detectors) के जोड़े के साथ लगाया जाता है। जब भी उपयोगकर्ता (user) स्क्रीन को छूता है, तो फोटो डिटेक्टर प्रकाश द्वारा प्रतिरूपित प्रकाश(light emitted) के पैटर्न में किसी भी छवि का पता लगाता है ।

सतह ध्वनिक लहर(Surface Acoustic wave)

सतह ध्वनिक लहर प्रौद्योगिकी (surface acoustic wave technology) में दो ट्रांसड्यूसर (transducers) होते हैं जिन्हें एक्स और वाई अक्ष (X-axis and Y-axis) के साथ रखा जाता है और कुछ रिफ्लेक्टर के साथ मॉनिटर की ग्लास प्लेट होती है। जब स्क्रीन को छुआ जाता है, तो तरंगों को अवशोषित (waves are absorbed) किया जाता है और उस बिंदु पर एक स्पर्श (touch) का पता लगाया जाता है। ये परावर्तक एक ट्रांसड्यूसर (transducers) से दूसरे ट्रांसड्यूसर (transducers) में भेजे गए सभी विद्युत संकेतों को दर्शाते हैं। यह प्रौद्योगिकी गुणवत्ता (quality) के माध्यम से उत्कृष्टता प्रदान करती है।

टच स्क्रीन के घटक (Components of touch screen)

एक बुनियादी (basic) टच स्क्रीन में तीन मुख्य घटकों के रूप में एक टच सेंसर(touch sensor), एक नियंत्रक (controller) और एक सॉफ्टवेयर ड्राइवर(software driver) होता है। टच स्क्रीन को टच स्क्रीन सिस्टम (touch screen system) बनाने के लिए डिस्प्ले और पीसी(display and a PC) को साथ में जोड़ा जाना आवश्यक है।

  1. टच सेंसर(touch sensor): सेंसर में आम तौर पर विद्युत प्रवाह अर्थात बिजली का प्रवाह होता है जो sensor के माध्यम से प्रवाहित हो रहा होता है इसी के साथ सेंसर के माध्यम से एक संकेत (signal) भी प्रवाहित होता है जव भी स्क्रीन को छुआ जाता है तो इस संकेत(signal) में परिवर्तन होता है इस परिवर्तन का उपयोग स्क्रीन के स्पर्श (touch) के स्थान को निर्धारित करने के लिए किया जाता है |
  2. नियंत्रक(Controller): एक नियंत्रक(Controller) टच सेंसर(touch sensor) और पीसी(PC) अर्थात कंप्यूटर के बीच जुड़ा होता है। नियंत्रक(Controller)सेंसर से जानकारी लेता है और पीसी की समझ के लिए इसका अनुवाद(translation) करता है।नियंत्रक(Controller)निर्धारित करता है कि किस प्रकार के कनेक्शन की आवश्यकता है।
  3. सॉफ्टवेयर ड्राइवर(Software driver): यह कंप्यूटर और टच स्क्रीन को एक साथ काम करने की अनुमति(permission) देता है। यह ओएस(OS) को बताता है कि नियंत्रक(Controller) से भेजे गए टच इवेंट(touch event) की जानकारी से कैसे इंटरैक्ट (interact) अर्थात कैसे उसको पढ़ा, समझा और उस पर कार्य किया जाय जाए।

अनुप्रयोग (Application)

  • टच स्क्रीन का प्रयोग रिमोट कण्ट्रोल द्वारा किया जाता है|
  • केवल टच स्क्रीन को छूने और एक ग्राफिकल इंटरफ़ेस(graphical interface) के साथ ही वास्तविक समय में(In real time), कठिन से कठिन कार्यो की निगरानी, नियंत्रण और उन्हें किया जा सकता है|
  • एक ओर ट्रांसमिशन के अंत में (at the transmission end), टच स्क्रीन कंट्रोल यूनिट का उपयोग कर रोबोट को विशिष्ट दिशाओं जैसे आगे, पीछे, बाईं ओर और दाईं ओर घूमाया जा सकता है । और दूसरे अंत में (at the receiving end) चार मोटर्स माइक्रोकंट्रोलर एक साथ साथ टकराते (interfaced) हैं। उनमें से दो का उपयोग रोबोट के आर्म और ग्रिप मूवमेंट(Arm and grip movement of the robot) के लिए किया जाता है और अन्य दो का उपयोग बॉडी मूवमेंट(body movement) के लिए किया जाता है।
  • कॉल के जवाब देने, कर्मचारियों के साथ संपर्क करने ,वाहनों और रोबोटों के संचालन (operating) के लिए वायरलेस संचार का उपयोग करके टच स्क्रीन तकनीक का उपयोग किया जाता हैं। इसप्रकार के कार्यो के लिए, आरएफ संचार या अवरक्त संचार (RF communication or infrared communication) का उपयोग किया जाता है।

बार-कोड रीडर (Bar code reader)

बार-कोड रीडर (Bar code reader) का प्रयोग Product के ऊपर छपे हुए बार कोड को पढ़ने के लिये किया जाता है किसी Product के ऊपर जो Bar Code बार-कोड रीडर (Bar code reader) के द्वारा उत्पाद की कीमत तथा उससे सम्बंधित दूसरी सूचनाओ को प्राप्त किया जा सकता हैं|

स्कैनर (Scanner)

स्केनर (Scanner) एक Input Device है ये कंप्यूटर में किसी Page पर बनी आकृति या लिखित सूचना को सीधे Computer में Input करता है इसका मुख्य लाभ यह है कि User को सूचना टाइप नहीं करनी पड़ती हैं|

ओ.एम.आर. (OMR)

ओ.एम.आर. (OMR) या ऑप्टिकल मार्क रीडर (Optical Mark Reader) एक ऐसा डिवाइस है जो किसी कागज पर पेन्सिल या पेन के चिन्ह की उपस्थिति और अनुपस्थिति को जांचता है इसमें चिन्हित कागज पर प्रकाश डाला जाता है और परावर्तित प्रकाश को जांचा जाता है|

जहाँ चिन्ह उपस्थित होगा कागज के उस भाग से परावर्तित प्रकाश की तीव्रता कम होगी | ओ.एम.आर. (OMR) किसी परीक्षा की उत्तरपुस्तिका को जाँचने के लिये प्रयोग की जाती है| इन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र में वैकल्पिक प्रश्न होते हैं |

ओ.सी.आर. (OCR)

ऑप्टिकल कैरेक्टर रेकोग्निशन (Optical Character Recognition) अथवा ओ.सी.आर.(OCR) एक ऐसी तकनीक है | जिसका प्रयोग किसी विशेष प्रकार के चिन्ह, अक्षर, या नंबर को पढ़ने के लिये किया जाता है इन कैरेक्टर को प्रकाश स्त्रोत के द्वारा पढ़ा जा सकता हैं| ओ.सी.आर (OCR) उपकरण टाइपराइटर से छपे हुए कैरेक्टर्स, कैश रजिस्टर के कैरक्टर और क्रेडिट कार्ड के कैरेक्टर को पढ़ लेता हैं| ओ.सी.आर (OCR) के फॉण्ट कंप्यूटर में संग्रहित रहते है | जिन्हें ओ.सी.आर. (OCR) स्टैंडर्ड कहते हैं|

ए.टी.एम.(ATM)

स्वचालित मुद्रा यंत्र या ए.टी.एम. (Automatic Teller Machine) ऐसा यंत्र है जो हमे प्रायः बैंक में, शॉपिंग मौल में, रेलवे स्टेशन पर, हवाई अड्डों पर, बस स्टैंड पर, तथा अन्य महत्वपूर्ण बाजारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर मिल जाता हैं| ए.टी.एम. की सहायता से आप पैसे जमा भी कर सकते है, निकाल भी सकते है, और बैलेंस भी चेक कर सकते है| ए.टी.एम. की सुबिधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है|

एम.आई.सी.आर. (MICR)

मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकोग्निशन (Magnetic Ink Character Recognition) व्यापक रूप से बैंकिंग में प्रयोग होता है, जहाँ लोगो को चेकों की बड़ी संख्या के साथ काम करना होता हैं|

इसे संक्षेप में एम.आई.सी.आर.(MICR) कहाँ जाता हैं| एम.आई.सी.आर (MICR) का प्रयोग चुम्बकीय स्याही (Megnatic Ink) से छपे कैरेक्टर को पढ़ने के लिये किया जाता हैं| यह मशीन तेज व स्वचलित होतीहैं साथ ही इसमें गलतियां होने के अवसर बिल्कुल न के बराबर होते हैं|

सरल शब्दों में सारांश -

  1. इनपुट डिवाइस वे डिवाइस होती हैं जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को कम्‍प्‍यूटर में इनपुट करा सकते हैं।
  2. इनपुट डिवाइस कम्‍प्‍यूटर तथा मानव के मध्‍य संपर्क की सुविधा प्रदान करते हैं।
  3. इनपुट डिवाइस वे डिवाइस होती हैं जो हमारे निर्देशों या आदेशों को कम्‍प्‍यूटर के मष्तिष्‍क , सी.पी.यू. तक पहुचाते हैं।
  4. मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकोग्निशन का प्रयोग व्‍यापक रूप से बैकिंग फील्‍ड में होता हैं।
  5. ऑप्टिकल मार्क रीडर एक ऐसा डिवाइस है जो किसी कागज पर पेन्सिल या पेन के चिन्ह की उपस्थिति और अनुपस्थिति को जांचता है।
  6. ऑप्टिकल कैरेक्टर रेकोग्निशन एक ऐसी तकनीक हैं जिसका प्रयोग किसी विशेष प्रकार के चिन्‍ह, अक्षर एवं नंबर को पढ़ने के लिये किया जाता हैं।
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